!!खांमोशी की सज़ा हमे यूं न दो!!

खांमोशी की सज़ा हमे यूं न दो,

की धड़कते दिल की धड़कन

सदा के लिए खामोश हो जाए!

अपने तनहा ख्वाब मे ही सही,

एहसासों को अपने लब छूने दो,

की एक बार फ़िर जीने की ख्वाइश हो जाए!!

कोई तो ऐसा मौका दो,

जब दिल का एहसास जुबान पर आ जाए!

न चाहो इन्हे तो रहने दो,

गर हो पसंद तो मौन समर्थन हो जाए!!

.....एहसास

1 टिप्पणी:

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

http://madan-saxena.blogspot.in/
http://mmsaxena.blogspot.in/
http://madanmohansaxena.blogspot.in/

धन्यवाद !

एहसासों के सागर मैं कुछ पल साथ रहने के लिए.....!!धन्यवाद!!
पुनः आपके आगमन की प्रतीक्षा मैं .......आपका एहसास!

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