प्रीतम रात

आ गया चाँद , साथ   तारों की बारात आयी हे!
दीदार ए  यार की फिर मिलन की बेला आयी हे!
तेरा आना हो या न हो ए सितमगर,
तेरी याद मेरी चाहत की डोली बैठ आयी हे!!

आँखों से गिरती ये रिमझिम,
ये होटों का सिसकन संगीत!
तड़प को ले बाहों में ये सेज सजाई हे!
दिल जला के तुझसे लिए सात  फेरे......
साँसों का गठबंधन तेरी छाया संग,
अंधियारे से रोशन फिर प्रीतम रात आयी हे!!
फिर प्रीतम रात आयी हे!!

ख्वाबों का घूँघट, वादों का मंगलसूत्र .....
प्रीत की बिंदिया, रीत का बिछिया।...
बेवफाई की काया समाई हे !
बीते हर पल की खामोश चीत्कार लिए.....




फिर प्रीतम रात आयी हे!!
फिर प्रीतम रात आयी हे!!

एहसास।...........

6 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरत ....

EHSAAS ने कहा…

dhanywaad sangeeta ji......

poonam ने कहा…

khubsurat ahsaas

S.N SHUKLA ने कहा…


ख़ूबसूरत रचना, सुन्दर भाव, बधाई.

मेरे ब्लॉग " meri kavitayen "की नवीनतम पोस्ट पर आपका स्वागत है .

Prabodh Kumar Govil ने कहा…

raat roz aati hai, par aapki pukar man-sparshi hai.

Prabodh Kumar Govil ने कहा…

raat roz aati hai, par aapki pukar man-sparshi hai.

धन्यवाद !

एहसासों के सागर मैं कुछ पल साथ रहने के लिए.....!!धन्यवाद!!
पुनः आपके आगमन की प्रतीक्षा मैं .......आपका एहसास!

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