फासले


फासले

ये फासले तेरे - मेरे!
मुझे तेरे नजदीक लाते हैं!
जब जब उठती हैं, नज़रें तेरी तरफ़......
ये कदम ख़ुद - बा - ख़ुद,
तेरी राहों पे उठ जाते हैं!!

कसमे खायीं, वादे किए ख़ुद से कई बार मगर!
जब भी भुलाना चाहा तुझे,
तेरी यादों के बादल ......
उमडे चले आते हैं!!

तुझे बेवफा कहूं भी तो कैसे,
आख़िर इतने फासलों के बावजूद...
तेरे सितम मुझ से,
शिद्दत से वफ़ा निभाते हैं!!

तू खुश रहे यूँही,
यूँही इश्क के दमन मैं झूले!
इश्क तुमसे किया ये गुनाह हमारे थे....
तभी तो अकेले हम, सजा पाते हैं!!

गुनाह के ये मोटी क़यामत तक...
दमन मैं सहेजेंगे!
फ़ना हो जायेंगे ख़ुद....
इश्क के गुलिस्तान आबाद रखेंगे!
न भुलायेंगे कभी तुझे, न भुलाने देंगे....
तेरी यादों मैं सदान जियेंगे, ये कसम खाते हैं!!
ये फासले तेरे मेरे.....
मुझे तेरे नजदीक लाते हैं..........


....एहसास!

धन्यवाद !

एहसासों के सागर मैं कुछ पल साथ रहने के लिए.....!!धन्यवाद!!
पुनः आपके आगमन की प्रतीक्षा मैं .......आपका एहसास!

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