अंकित विश तुझे जनम दिन।।




दिन कटा था गिन-गिन,
आईं थी खुशियां इसी दिन।
तांक झाँक करती थीं आंखें, 
किलकारियां शब्दों के बिन,
चल चलें यादों में आज….पहले,
विश तुझे जनम दिन।।

माँ का दुलारा-बाप का प्यारा, 
भाई-बहिन की आंखों का तारा।
नटखट चंचलता की मूरत, 
जैसे जन्मे हों कान्हा दुबारा।।
घर-आंगन खिलखिलाए, 
भोर से लेकर पूरे दिन,
सब पर जमके धौंस चलाये…...अच्छा है,
विश तुझे जनम दिन।।


भावों से बतलाता है, 
शब्दों से बहलाता है।
हो उदास कितना भी अंदर, 
बाहर से मुस्काता है।
थकने से अक्सर डरता है, 
धरे कदम पर डरे बिन,
चाल समझना उसकी मुश्किल…..ओह्ह
विश तुझे जनम दिन।।


बात कुछ हो आधी-आधी, 
हर लम्हे में साझेदारी।
ना कोई पीछे न कोई आगे, 
यार की यारी-वारी न्यारी।
दिल चुरा ले हंस के यारा, 
किसी कलाकारी के बिन,
पर सुनता ना बात किसी की…सुन
विश तुझे जनम दिन।।


सबका है पर नही किसीका, 
दिल जो करे वो दिल उसीका।
हर रिश्ते की पहचान पे "अंकित", 
बेमन हो या मन खुशी का।
नन्हा दिल-मासूम अदाएं, 
गहरी आंखें- ग्रंथ सविन।
नाच नचादे अछे-अछे को….अभी,
विश तुझे जनम दिन।।


श्रेष्ठ की रखता है चाहत, 
नही किसी कमी से आहत।
बढ़ा जा रहा सधे कदम से, 
सुने भविष्य कदमो की आहट।
मिले वो मंजिल जो भी चाहे, 
रहे ना कोई राह कठिन,
अंकित दृढ "अंकित" की सफलता….बस
विश तुझे जनम दिन।।


स्नेह के साथ….शुभ जन्मदिन। 

एहसास….!

धन्यवाद !

एहसासों के सागर मैं कुछ पल साथ रहने के लिए.....!!धन्यवाद!!
पुनः आपके आगमन की प्रतीक्षा मैं .......आपका एहसास!

विशेष : यहाँ प्रकाशित कवितायेँ व टिप्पणिया बिना लेखक की पूर्व अनुमति के कहीं भी व किसी भी प्रकार से प्रकाशित करना या पुनः संपादित कर / काट छाँट कर प्रकाशित करना पूर्णतया वर्जित है!
(c) सर्वाधिकार सुरक्षित 2008